- नगर निगम चुनाव में मिली हार के कारण तलाशने के लिए कांग्रेस ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटियां गठित कीं
- मंडी, धर्मशाला और सोलन में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
- करारी हार के बाद संगठन अब जमीनी स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं से लेगा फीडबैक
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी आत्ममंथन की तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने मंडी, धर्मशाला और सोलन नगर निगम चुनावों में हार के कारणों का पता लगाने के लिए अलग-अलग फैक्ट फाइंडिंग कमेटियों का गठन किया है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) विनोद जिंटा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। गठित समितियां संबंधित क्षेत्रों का दौरा करेंगी और पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय पदाधिकारियों से बातचीत कर हार के कारणों का विस्तृत विश्लेषण करेंगी।
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने सभी समितियों को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। पार्टी का मानना है कि रिपोर्ट के आधार पर संगठन की कमजोरियों और चुनावी रणनीति की कमियों को पहचानकर भविष्य में सुधार किया जा सकेगा।
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि यह केवल हार के कारणों की समीक्षा नहीं होगी, बल्कि संगठन को मजबूत बनाने और आगामी चुनावों के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

धर्मशाला नगर निगम के लिए गठित समिति
- करण सिंह पठानिया (संयोजक)
- अमित भरमौरी (सदस्य)
- यशवंत खन्ना (सदस्य)
- मनमोहन कटोच (सदस्य)
मंडी नगर निगम समिति
- चेतराम ठाकुर (संयोजक)
- पवन ठाकुर (सदस्य)
- हरिकृष्ण हिमराल (सदस्य)
- सत्यजीत नेगी (सदस्य)
सोलन नगर निगम समिति
- अमित नंदा (संयोजक)
- चंद्र शेखर शर्मा (सदस्य)
- यशपाल तनिक (सदस्य)
- धर्मेंद्र धामी (सदस्य)
तीनों नगर निगमों में कांग्रेस को बड़ा झटका
31 मई को घोषित नगर निगम चुनाव परिणामों में कांग्रेस को तीनों नगर निगमों में निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।
- मंडी नगर निगम की 14 सीटों में कांग्रेस केवल 1 सीट जीत सकी।
- धर्मशाला नगर निगम की 17 सीटों में कांग्रेस को 5 सीटें मिलीं।
- सोलन नगर निगम की 17 सीटों में पार्टी केवल 6 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले आए ये नतीजे कांग्रेस के लिए चेतावनी माने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी संगठन हार के कारणों को समझकर आगामी चुनावों में रणनीति सुधारने की कोशिश कर रहा है।



